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3 John

3 John front

3 यूहन्ना का त’आर्रूफ़ # 1 हिस्सा: आम त’आर्रूफ़# 3 यूहन्ना की किताब का बैरूनी ख़ाक:। त’आर्रूफ़ (1:1)1। मेहमान नवाज़ी करने के लिये हौसंला-अफ़्‍ज़ाही और हिदायत। (1:2-8)# दियोत्रिफुस और दिमुत्रियुस। (1:9-12)। नतीज: (1:13-14)# 3 यूहन्ना कि किताब को किसने लिखा। ख़त को लिखने वाला ख़ुद कि शिनाख़्त एक “बुर्ज़ुग” के तौर पर करता है।(1:1) ये ख़त मुमकिन तौर पर ऱसूल यूहन्ना ने अपनी ज़िन्दगी के आख़िरी दिनों में लिखा था। # 3 यूहन्ना कि किताब किस बारे में है? यूहन्ना ने ये ख़त गियुस नाम के एक ईमान रखने वाले शख़्स के लिये ये ख़त लिखा था। यूहन्ना ने गियुस को ये नसीहत दी थी कि वो उस के इलाके में सफ़र करने वाले दुसरे ईमान रखने वाले लोगों की मेहमान नवाज़ी करे। इस किताब के उनवान का तर्जुम: किस तरह से होना चाहिए? शायद मुतर्जिम इस किताब को इसके रवायती नाम “3 यूहन्ना” या “तीसरा यूहन्ना” के नाम से बुलाना चाहें। या फिर वो एक ज़्यादा साफ़ उनवान भी चुन सकते हैं, जैसे कि “यूहन्ना कि तरफ़ से तीसरा ख़त” या फिर “यूहन्ना का लिखा हुआ तीसरा ख़त।” 2 हिस्सा: ज़रूरी मज़हबी और रवायती तसव्वर## मेहमान नवाज़ी क्या है? # मेहमान नवाज़ी पुराने ज़माने के नज़दीकी पुर्वी इलाकों का एक ज़रूरी तसव्वर था। मेहमान नवाज़ी कदीम करीब मशरक का एक ज़रुरी तसव्वर था। गैर-मुल्की या बैरूनी लोगों के साथ दोस्ताना होना ज़रुरी था और अगर उन्हे ज़रूरत हो तो उनकी मदद करना भी ज़रूरी था। 2 यूहन्ना की किताब में यूहन्ना चाहता था कि मोमीन झुठे उस्तादों कि ख़िदमत ना करें। 3 यूहन्ना कि किताब में यूहन्ना मोमीनों को नसीहत दे रहा है कि वो ईमानदार इस्तादों कि मेहमान नवाज़ी करने की नसीहत देता है। 3 हिस्सा: - ज़रूरी तर्जुमे के मसले ## ख़त को लिखने वाल इस में किस तरह से ख़ानदान के रिश्तों का इस्तेमाल कर सकता है? मुसन्निफ़ इस जगह में “भाई” और “बच्चे” जैसे अल्फ़ाज़ों का इस्तेमाल करता है। पर इस ख़त में अल्फ़ाज़ों का इस्तेमाल मोमीनों का हवाला देने के लिये करता है। और, यूहन्ना कुछ मोमीनों को अपने “फ़र्ज़न्द” भी बुलाता है। ये वो मोमीन है जिन्हे यूहन्ना ने मसीह के हुक्म मानना सिखाया था। यूहन्ना इस जगह में “गैर-कोम” अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल इस तरह से किया है जो समझने में मुश्किल है। फज़्ल में इस गैर-यहूदी लोगों का हवाला देने के लिये “गैर-कोम” जैसे अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल काफ़ी बार हुआ है। पर इस ख़त में यूहन्ना ने इस अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल उन का हवाला देने के लिये किया है जो येसु में ईमान नही रखते।

3 John 1

3 John 1:1

ये यूहन्ना का गियुस को एक ज़ाती ख़त है। इस जगह में “तुम” या “तुम्हारा” जैसे जितने भी अल्फ़ाज़ है, वो गियुस का हवाला देते हैं और सिर्फ एक शख़्स के लिये हैं।

ὁ πρεσβύτερος

ये यिसू के ऱसूल और शार्गिद, यूहन्ना का हवाला देता है। या तो बूढ़ा होने की वजह से या फिर शायद कलीसिया का रहनुमा होने की वजह से, वो खुद का हवाला एक “बुज़ूर्ग” के तौर पर देता है। मै, बुर्ज़ुग यूहन्ना, लिखता हूं।”

Γαΐῳ

ये एक साथी मोमीन है जिसे यूहन्ना ये ख़त लिख रहा है।

ὃν ἐγὼ ἀγαπῶ ἐν ἀληθείᾳ

जिसे मै हकिकत में मुहब्बत करता हूं।

3 John 1:2

περὶ πάντων…σε εὐοδοῦσθαι καὶ ὑγιαίνειν

तुम हर बात में बेहतरी से रहो और तन्दरूस्त बनो।

καθὼς εὐοδοῦταί σου ἡ ψυχή

जिस तरह से तुम रूह़ानी तौर पर बेहतरी से जी रहे हो।

3 John 1:3

ἐρχομένων ἀδελφῶν

साथी मोमीन आए। ये लोग मुमकिन तौर पर सब मर्द थे।

σὺ ἐν ἀληθείᾳ περιπατεῖς

“राह पर चलना” एक जुमला है कि कोई शख़्स किस तरह से अपनी ज़िन्दगी जीता है। अलग तर्जुम: - “तुम अपनी ज़िन्दगी ख़ुदा की सच्चाई के मुताबिक जी रहे हो।”

3 John 1:4

τὰ ἐμὰ τέκνα

यूहन्ना उन लोगों के बारे में बात कर रहा है जिन्हे उसने अपने फ़र्ज़न्दो कि तरह येसु में ईमान रखना सिखाया। ये उन लोगों के लिये यूहन्ना की मुहब्बत और फिक्र पर ज़ोर डालता है। ये इसलिये भी हो सकता है क्योंकी उसने ख़ुद ही ख़ुदा तक ख़ुदा तक रहनुमाई कि थी। अलग तर्जुम: - “मेरे रूह़ानी फ़र्ज़न्द।”

3 John 1:5

यहां पे इस लफ़्ज़ “हम” यूहन्ना और उन लोगों का हवाला देता है जो उसके साथ हैं, ओर मुमकिन तौर पर सब ईमान रखने वाले लोगों का भी हवाला दे रहा है।

इस ख़त को लिखने में यूहन्ना का मकसद गियुस कि तारीफ़ रना था कि जिस तरह से उसने बाइबल की ता’लीम देने वालों की मेहमान नवाज़ी की थी; फिर वो दो लोगों कि बात करता है, एक अच्छा ओर दुसरा बुरा।

ἀγαπητέ

यहां ये साथ के मोमीनों के साथ प्यार जताने के लिये इस्तेमाल हुआ है।

πιστὸν ποιεῖς

तुम वो कर रहे हो जो ख़ुदा के लिये भरोसेमंद है या “तुम ख़ुदा के साथ ईमानदार हो।”

ὃ, ἐὰν ἐργάσῃ εἰς τοὺς ἀδελφοὺς καὶ τοῦτο ξένους

साथी मोमीनों की मदद करो और उनकी भी जिन्हे तुम नही जानते।

3 John 1:6

οἳ ἐμαρτύρησάν σου τῇ ἀγάπῃ ἐνώπιον ἐκκλησίας

ये लफ़्ज़ “अजनबी” का बखान करते हैं, (आयत 5)। “अजनबी जिन्होने कलीसिया में ईमान रखने वाले लोगों को बताया कि तुमने उनसे कितनी मुहब्बत जताई।

καλῶς ποιήσεις, προπέμψας

यूहन्ना गयूस की मोमीन लोगों की मदद करने कि आम आदत के लिसे उसका शुक्रिया कर रहा है।

3 John 1:7

γὰρ τοῦ ὀνόματος ἐξῆλθον

यहां “नाम” येसु का हवाला देता है। अलग तर्जुम: - “क्योंकी वो लोगों को येसु के बारे में बताने के लिये बाहर गये।”

μηδὲν λαμβάνοντες

कोई भी तोहफा या मदद ना पाना।

τῶν ἐθνικῶν

यहां “गैर-कौम” के मायने सिर्फ गैर-यहुदी नही है। यहां इसके मायने मामुली तौर उन लोगों से है जो येसु में ईमान नही रखते।

3 John 1:8

ἵνα συνεργοὶ γινώμεθα τῇ ἀληθείᾳ

ताकी हम लोगों में ख़ुदा की सच्चाई का ऐलान करने में उनके साथ मुताफ़िक हों।

3 John 1:9

ἡμᾶς

इस अल्फ़ाज़ “हम” से यूहन्ना और उसके साथ लोगों का हवाला दिया गया है पर इस में गियुस शामिल नही है।

τῇ ἐκκλησίᾳ

ये गियुस और उन लोगों का मोमीनों की उस शिरकत का हवाला देता है जो ख़ुदा की परस्तिश करने के लिये जमा हुए थे।

Διοτρέφης

वो कलीसिया का रूक़ान था।

ὁ φιλοπρωτεύων αὐτῶν

जो उन सब के बीच में सबसे ख़ास होने से मुहब्बत रखता था या “जो इस तरह से पेश आना चाहता था कि जैसे वो उनका रहनुमा हो।”

3 John 1:10

λόγοις πονηροῖς φλυαρῶν ἡμᾶς

और जिस तरह से वो हमारे बारे में बदी की बातें कहता है जो की सच नही है।

αὐτὸς ἐπιδέχεται τοὺς ἀδελφοὺς

साथी मोमीनों की ख़ुश’आमदीद नही की।

τοὺς βουλομένους κωλύει

उन बंदो को रोकते हैं जो मोमीनों की ख़ुश’आमदीद करना चाहते हैं।

ἐκ τῆς ἐκκλησίας ἐκβάλλει

वो उन पे कलीसिया छोड़ने के लिये ज़ोर डालते हैं।

3 John 1:12

ἡμεῖς

यहां “हम” यूहन्ना और उसके साथ के लोगों का हवाला दिया गया है पर इस में गियुस शामिल नही है।

3 John 1:11

ἀγαπητέ

यहां ये साथी मोमीनों से प्यार जताने लिये इस्तेमाल हुआ है। देखिये आपने इसका तर्जुम: 3 यूहन्ना 1:5 / 01/ 05 में किस तरह से किया है।

μὴ μιμοῦ τὸ κακὸν

जो बदी के काम लोग करते हैं वैसे काम मत करो।

ἀλλὰ τὸ ἀγαθόν

यहां कुछ अल्फ़ाज़ लिखे नही गये हैं पर वो यहां समझ में आते हैं। अलग तर्जुम: - “पर जो नेकी के काम लोग करते हैं, वैसा ही करो।”

ἐκ τοῦ Θεοῦ ἐστιν

ख़ुदा के बनो।

οὐχ ἑώρακεν τὸν Θεόν

ख़ुदा के नही हैं या “ख़ुदा में ईमान नही रखते।”

3 John 1:12

Δημητρίῳ μεμαρτύρηται ὑπὸ πάντων

इसे बड़ी सरगरमी के साथ लिखा जा सकता है। अलग तर्जुम: - “जो भी जानते हैं कि देमेत्रियुस इस का गवाह है” या “हर मोमीन जानता है कि देमेत्रियुस उसके बारे में अच्छी बातें कहता है।”

Δημητρίῳ

मुमकिन तौर पर ये कोई शख़्स है जिसके लिये यूहन्ना चाहता कि गियुस और कलीसिया उसकी खुश’आमदीद करे जब वो वहां आये।

ὑπὸ αὐτῆς τῆς ἀληθείας

सच्चाई ख़ुद के लिये ख़ुद की बेहतर कहती है। यहां “सच्चाई” का बखान एक बोलने वाले शख़्स के तौर पर किया गया है। अलग तर्जुम: - “कोई भी शख़्स जो सच्चाई कोई जानता ह, वो ये जानता किवो एक बेहतर शख़्स है।”

καὶ ἡμεῖς δὲ μαρτυροῦμεν

यूहन्ना जिस बात की तसद़ीक करता है उसे यहां पर मफ़हूम और मुकर्रर किया जा सकता है। अलग तर्जुम: - “हम भी देमेत्रियुस के बारे में अच्छा बोलते हैं।”

3 John 1:13

ये यूहन्ना के गियुस को लिखे हुए ख़त का आखिर है। वो कुछ आख़िरी हाशिये लिखता है और ख़ैरकदम के साथ इस ख़त को पूरा करता है।

οὐ θέλω διὰ μέλανος καὶ καλάμου σοι γράφειν

यूहन्ना इन दुसरी चीज़ों को बिल्कुल भी नही लिखना चाहता था। वो ये नही कहता कि उन्हे कलम ओर स्याही बढ़कर किसी और चीज़ नही लिखेगा।

3 John 1:14

στόμα πρὸς στόμα

“आमने-सामने” एक जुमला है जिसके मायने है “मिल-कर।” अलग तर्जुम: - “मिल-कर।”

3 John 1:15

εἰρήνη σοι

ख़ुदा तुम्हे इत्मीनान दे।

ἀσπάζονταί σε οἱ φίλοι

यहां के दोस्त तुम्हे सलाम कहते है।

ἀσπάζου τοὺς φίλους κατ’ ὄνομα

वहां पे हर एक मोमीन को मेरा सलाम देना।